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शास्त्री नगर
दिल्ली।
दिनांक : 20.8.2013
प्रिय विकास
बहुत बहुत स्नेह।
आशा है, ईश्वर की कृपा से अब तुम स्वस्थ और प्रसन्न होंगे। कल संध्या के समय तुम्हारा पत्र मिला। तभी से मन बहुत चिन्तित है। जहाँ तक मैं समझती हूँ, यह सब तुम्हारी स्वास्थ्य के प्रति उपेक्षा के कारण ही हुआ है। यह सत्य है कि तुम्हें पढ़ाई के दौरान कठिन परिश्रम करना पड़ता है, किन्तु इसका यह अर्थ तो नहीं कि तुम अपने स्वास्थ्य को दाँव पर लगाकर पढ़ाई करो।
इस संसार में स्वास्थ्य बड़ी दुर्लभ वस्तु है। स्वास्थ्य ऐसा धन है, जो प्रतिक्षण ही मनुष्य की अपनी गाँठ में रहता है। अत्यंत धन-वैभव और मान-सम्मान के होने पर भी यदि मनुष्य स्वस्थ नहीं है, तो उस जैसा गरीब व्यक्ति इस संसार में नहीं है।
अतः प्रातः काल उठकर स्वच्छ वायु सेवन करने के लिए बाहर खुले मैदान में घूमने के लिए जाओ। हो सके तो थोड़ा व्यायाम व योगासन करो। नियम से स्नान और खाने-पीने का ध्यान रखो।
आशा है कि शीघ्र ही अपने स्वस्थ होने की सूचना दोगे तथा साथ ही अपना कार्यक्रम भी लिखोगे। मुझे खुशी होगी अगर तुमने इस विषय में रुचि दिखाई। सम्भवतः समय मिलते ही आपके पास पिताजी आयेंगे। पत्र अवश्य लिखते रहना। शेष कुशल से हैं। पत्र की प्रतीक्षा में
तुम्हारी बहन
रेनू शर्मा